ये लड़ाई तो बिल्कुल नहीं थी,बस दोस्तों के बीच तनाव था,जिससे मैं बखूबी बाहर आ पाया।पर एक बात यह भी थी,की मैं रोज खुद से जंग जितने की कोशिश किया करता था,फिर भी खुश न था।
Thursday, 23 November 2017
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ملیحہ مصافر कठोर मुसाफ़िर (मिनी सिरीज़)
मलीहा मुसाफ़िर एपिसोड -१ जीवन काल के सीमित चक्र में मानव बाल्यकाल से लेकर अपने अंतिम क्षणों तक कुछ न कुछ सीखता ही रहता है,और खुद को हर तरह क...
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कुछ मुरझाए गुलाब की पंखुड़ियों की ही तरह, कुछ अजीब सी लगने लगी है जिंदगी, अब इन मुलायम पंखुड़ियों की कोई जगह नहीं, ज़िन्दगी और भी बहुत कुछ ह...
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(पोस्टर में उक्त तस्वीर स्वयं अनुराग यादव द्वारा खींची गई है,अगर आप रायगढ़ से हैं तो इस जगह को जरूर पहचानें।) बेनाम रास्ते भाग-...
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